योग हमारे देश की बहुमूल्य
निधि है जिसे सारे संसार में बहुत अधिक सम्मान दिया गया है. योग का अर्थ ही भगवान्
से जुड़ना है. जहाँ से हमारा वियोग है वहां से हमारा योग हो सके. हमारा माया से योग
हो रहा है. माया से हम वियोग करें और मायापति से योग करें. पतंजलि ऋषि ने कहा है
की योग अनुशासन का नाम है . अपने आप को अनुशासित करे. अपनी दिनचर्या, अपना रहन-सहन , अपना व्यवहार,
अपना आचरण और अपने आपको नियम में बांधिए जिससे ये जीवन सुन्दर बन सके
और आप संसार के संघर्षों में खरे उतर सके. आपको अपना जीवन और सुन्दर बनाने के लिए
व्यवस्थित होना पड़ेगा. योजनाएं बनाकर चलना पड़ेगा. रात्री में ही अगले दिन की
तैयारी कर लेना अच्छा है.
यदि प्रभात का स्वागत आप उलझनों
और बहुत सा काम लेकर सवेरे करेंगे तो सारा दिन तनाव में बीतेगा. जिस आदमी की
प्रभात अच्छा होता है उसका मध्य्याह भी अच्छा होता है. जिसका मध्याह अच्छा, उसकी सांझ अच्छी. जिसकी सांझ अच्छी, उसकी रात अच्छी. जिसकी रात अच्छी, उसकी प्रभात
अच्छी. इस तरह जो व्यवस्थित, उसका जीवन अच्छा. अपने को
सुव्यवस्थित करने की योग्यता का नाम ही योग माना जा सकता है.

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